मेरा फोटोग्राफी का शौक
मेरा फोटोग्राफी का शौक मुझमें बचपन से ही कुछ नया करने की लगन थी। जब मैं हाई स्कूल में हल्दौर पढ़ता था। तो मैंने जीवन में पहला कैमरा लिया। ये कैमरा झालू में बड़े महल के दक्षिण की साइड में रहने वाले विद्या सागर साहब से दस रूपये मे खरीदा। इसमें ऊपर से ओबजेक्ट देखकर फोटो खींचा जाता था। कुछ ही फोटो खींचे की हल्दौर के एक सोती नाम के साथी ने मांग लिया। बाद में कह दिया कि खो गया। पत्रकारिता शुरू की तो पत्रकार साथी मास्टर रामकुमार से कैमरा उधार मांग लिया। ये क्लिक थर्ड कैमरा था। मैं भाटिया बुक स्टाल पर बैठता था। यहीं बिजनौर शहर के बड़े रईस जानी भाई का आना जाना था। कभी इनके शीरे के खत्ते होते थे। इन खत्तों( पक्के गड्ढों) में ये शीरा एकत्र करते और बेचते। स्टेशन से नजीबाबाद मार्ग को जोड़ने वाले मार्ग के उत्तर में इनकी भव्य कोठी थी।स्टेशन के सामने गेस्ट हाउस था। शीरे का काम खत्म होने और पारिवारिक बंटवारा हो जाते के कारण इनकी हालत खस्ता होने लगी। इससे पहले ये बहुत शौकीन थे। इनसे मैंने 150 रूपये में एगफा आइसोली थर्ड कैमरा खरीदा। ये ...