हाथघड़ी
कभी हाथ घड़ी की बड़ी महत्ता थी। हाथ घडी वाला सम्मान से देखा जाता था। अब तो मोबाइल में घड़ी आ गई। माबाइल की घड़ी ने अलग से घड़ी जरूरत ही खत्म कर दी। इसके बावजूद आज भी काफी व्यक्ति – महिलांए घड़ी बांधती हैं। महात्मा गांधी के समय में घड़ी प्रचलन में आ गई थी। पर वह हाथ में नही बंधती थी। जेब में रखी जाती थी।घड़ी की सुरक्षा के लिए उसमें चैन पड़ी होती। ये चैन घड़ी स्वामी की जेब के छेद मे बांध जाती । ताकि गिर न पड़े। घड़ी के डायल पर सुरक्षा कवर भी होता। इसी को हटाकर समय देखा जाता। धीरे – धीरे हाथ में बांधने वाली घड़ी प्रचलन में आ गईं।पर हमारी पढ़ाई के समय तक सबकी घड़ी तक पंहुच नहीं हो सकी थी। मैं तो बहुत गरीब परिवार से रहा। इसलिए परीक्षा में किसी न किसी की घड़ी मांग कर काम चलाया जाता। मेरे चाचा राजेंद्र शर्मा की आर्थिक हालात हमसे काफी बेहतर थी। मैं परीक्षा काल में प्रायः उनकी घड़ी अपने पास रखता।