ट्रेन हादसे की कवरेज और मैं
ट्रेन हादसे की कवरेज और मैं
बात बहुत पुरानी हो गई।उस समय परमेश्वरन अय्यर बिजनौर के डीएम थे । लगभग 12 बजे उनकी प्रेस कांफ्रेस खत्म करके में उनके कक्ष से बाहर निकला । डीएम के स्टेनों ने बुलाकर कहा -आपका फोन है। मेरठ कार्यालय से श्री राजेंद्र त्रिपाठी का फोन था । बताया कि चंदक से हरिद्वार जा रही ट्रेन के डिब्बे में बम फटा है। श्री राजेंद्र त्रिपाठी आज वाराणसी संस्करण के संपादक है।
उस समय मोबाइल नहींं होते थे।संभवतः श्री त्रिपाठी ने कार्यालय फोन किया होगा। वहां से यह बताने पर कि डीएम के कार्यालय में हैं, उन्होंने यहां का नंबर मिला लिया।
मैने बिजनौर से एक जीप किराए पर ली। ट्रेन के पीछे चल दिए। आज के आजतक ओर आईवीएन 7 के जिलाा प्रभारी संजीब शर्मा उस समय मेरे साथ काम करते थे। मैने उन्हें भी साथ ले लिया।। हरिद्वार पंहुचे तो पता लगा कि ट्रेन ज्वालापुर स्टेशन पर खड़ी है। लगभग अस्सी किलो मीटर ट्रेन का पीछा किया। हम ज्वालापुर पंहुच गए। घटना की जानकारी की। फोटो लिए। वहां तब तक कोई रिपोर्टर नहीं पंहुचा था। तभी डीआरएम मुरादाबाद भी पंहुच गए। वे अपने साथ हमें अस्पताल भी ले गए। घायलों को देखा। उन्होंने उनके उपचार के निर्देश दिए। हमें ब्रिफिँग की।
पता नहीं क्या दिमाग में आई कि हरिद्वार से हम मेरठ के लिए निकल पड़े। मेरठ अमर उजाला कार्यालय पहुंचे। तब तक हरिद्वार से घटना की न कोई सूचना आई थी। न फोटो। हम समाचार लिखकर और फोटो देकर मेरठ से बिजनौर निकल आए।
अगले दिन अमर उजाला में हमारे फोटो और समाचार छपे। यदि हमने जीप किराए पर लेकर ट्रेन का पीछा न किया होता , तो शायद ये समाचार छूट आता। श्री राजेंद्र त्रिपाठी अगर कार्यालय फोन कर मुझे न खोजते। डीएम कार्यालय फोन न मिलाते तो शायद यह समाचार हमें न मिल पाता।
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