जब बढ़ापुर के पत्रकार शराफत हुसैन का कत्ल होते बचा -
पत्रकारिता की भूली बिसरी कथाएं --
जब बढ़ापुर के पत्रकार शराफत हुसैन का कत्ल होते बचा -
बिजनौर में पुलिस अधीक्षक दिलीप त्रिवेदी का समय था।वह एक ईमानदार अधिकारी का कार्यकाल था। उनके कुछ किस्सेे आज भी याददाश्त से नहीं निकलते। जबकि अब वह सीआरपीएफ के डीजी पद से सेवानिवृत हो चुके हैं।त्रिवेदी जी का आदेश था कि डांस कंपनी नहीं चलेंगी। बढ़ापुर से उस समय 'अमर उजाला' के लिए शराफत हुसैन कार्य कर रहे थे। वहां डांस कंपनी चल रही थी।शराफत हुसैन द्वारा भेजी गयी रिपोर्ट हमने फोटो के साथ छापी। दिलीप त्रिवेदी साहब ने छापा लगवाया। चलती कंपनी पकड़ ली गयी। मजबूरन थानाध्यक्ष महोदय को उसे बंद कराना पड़ा। उनका बहुत आर्थिक नुकसान हुआ। एक ईमानदार अधिकारी की नजर में इमेज भी खराब हुई।शराफत कम्युनिष्ट पार्टी से जुड़े थे। वे पुलिस की ज्यादती समय- समय पर उठाते रहते थे।ईद से पहली रात को मैं आराम से सोया था। तीन बजे दरवाजा खड़कने पर आंख खुली । बढ़ापुर के दो कम्युनिष्ट साथी थे। मैँ उन्हें रात को तीन बजे देख कर चौंका ।उन्हें बैठाया। ठंड थी। वे दोनों कंबल लपेटे थे।उन्होंने बताया कि आज ईद की नमाज पढ़ने जाते समय शराफत का कत्ल हो जाएगा। थानाध्यक्ष ने जिन तीन बदमाशों को इसके लिए तैयार किया है। इनमें से एक की माँ ने यह बात शराफत की मां को बता दी है।मैँ नींद में था। मेरी समझ में नही आ रहा था कि क्या हो रहा है?मेरी पत्नी निर्मल चाय बना लायीं। चाय पीते समय मेरी समझ में आया कि मामला कुछ गंभीर है। उनके जाने पर निर्मल बोलीं---बढ़ापुर से ये एक बजे चले होंगे। ।तब तीन बजे आए। इतनी ठंड में ।मामला बहुत गंभीर है।
उस समय लैंड लाइन फोन थे।पांच बजे के आसपास मैने दिलीप त्रिवेदी साहब को फोन किया। वे बोले --सब ठीक तो है? इतनी जल्दी? मैंने उनको पूरी बात बतायी। उन्होंने कहा - चिंता मत करो। पता लगा कि उन्होंने सीओ नगीना को वायरलैस पर फौरन बताया कि आज ईद की नमाज पढ़ने जाते समय बढ़ापुर के पत्रकार शराफत हुसैन का कत्ल होना है। बढ़ापुर के एस. ओ. ने बदमाशों के साथ ये प्लॉन किया है। आप तुरंत बढ़ापुर जाएं और शराफत की सुरक्षा करें।अगर उसे कुछ होता है तो वहां के थानाध्यक्ष को गिरफ्तार कर जेल भेज दें।
बढ़ापुर एसओ ईदगाह जाने के लिए तैयार हो रहे थे। हैड मोहर्रिर ने ये मैसेज सुना। भागकर एसओ को बताया। एसओ नहाना - धोना सब भूल गए। जल्दी तैयार होकर अपने दफ्तर पहुंचे। इतनी देर में सीओ नगीना पहुॅच गए।सीओ नगीना के रूख को देखकर थानाध्यक्ष महोदय घबरा गए। पहले वह शराफत को मरवाना चाहते थे। अब उसकी सुरक्षा में लग गए। ईद ठीक बीत गई।
कोई और होता तो मौत के डर छिप गया होता।पर शराफत नवाज पढ़ने गए। ठसके से गए।ठसके से लौटे।
शराफत साहब का बाल भी बांका नहीं हुआ। दिलीप त्रिवेदी साहब के पास मेरा शाम को जाकर बैठना होता था। शाम को गया तो उन्होंने सारी कहानी बतायी।
इसके बाद शराफत साहब उस स्थान से बाहर चले गए। उन्होंने चीनी मिल नजीबाबाद में लंबे समय तक कार्य किया । अब वे सेवानिवृत हो भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी की राजनीति कर रहे हैं। आज संचार तंत्र बहुत विकसित हो गया है पर फिर भी यदि आज का युग होता तो आप फोन करते रहते, कोई अधिकारी अटैंड भी नहीं करता। बदमाश अपना काम कर चुके होते ।
अशोक मधुप
शराफत हुसेन की टिप्पणी
सही बात है उस वक़्त आरिफ रजा और कॉमरेड रघुवीर सैनी आपके पास गए थे,जब मै ईद की नमाज के लिए घर से निकला तब मेरे साथ दो पुलिस कर्मी तैनात रहे,पूर्व चेयरमैन नरेंद्र अग्रवाल जी की बैठक में उस वक़्त के इंचार्ज जनाब ओ पी तेवतिया ने मुझसे पूछा आप तो यहां हो कप्तान साहब के पास कौन गया मै तब अनजान बना रहा,बाद में उस वक़्त के ए एस पी मुरली धर चौधरी बढ़ापुर आए,अपना पक्ष रखने के लिए दारोगा साहब ने कस्बे के सारे दलालों को बुलाया पहले उन्हें एक नेता जी के यहां जल पान कराया गया ,लेकिन ए एस पी चौधरी ने दरोगा तेवतिया के साथी दलालों के एक बात नहीं सुनी सिर्फ सिर्फ मुझे बुलाया ,दिन के पांच बज रहे होंगे मै बिजनौर टाइम्स के रिपोर्टर छत्रपाल मास्टर को लेकर पुलिस स्टेशन गया ,वहां दारोगा जी ने माफी मांगी और मुंह मीठा कराके मामले का निपटारा किया ।भाई मधुप जी की वजह से मै बच गया और इन्हीं सब का नतीजा ये रहा की यहां की आवाम में मुझे अपना नुमाइंदा चुना । लेकिन जिन लोगों ने ये साज़िश रची थी आज कस्बे में उनका सरगना दयनीय हालात में है,गलती इनसे ये रही जिन लोगों को इन्होंने हायर किया उनमें से एक का बच्चे का ताल्लुक मेरे परिवार से काफी करीबी था ।अमर उजाला और भाई मधूप जी के स्नेह और सहयोग से मुझे नगर का प्रथम नागरिक चुने जाने का गर्व हमेशा रहेगा ।ये आस्सी के दशक का मामला है भाई साहब ने आज तमाम पुरानी यादें ताज़ा कर दी,इसके लिए उन्हें तहे दिल से दुआएं ।
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