नेपाल सिंह आर्य

 यादें पत्रकारिता 

एक बार डीएम की प्रेस कॉन्फ्रेंस थी । 30- 35 साल पुरानी घटना होगी।डीएम कौन थे ,यह तो अब याद नहीं। डीएम की प्रेस कांफ्रेंस में जनपद स्तर के सभी अधिकारी शामिल होते हैं।वे अपनी विभागीय योजनाओं की जानकारी देते और पत्रकारों की शिकायतों का जवाब भी देते।

बिजली का सदा संकट होता था।तो बिजली का मामला उठते ही बिजली पुराण शुरू हो जाती।इसके बाद सारे मामले रह जाते। बिजली पुराण में कांफ्रेंस खत्म हो जाती।

इस  प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिजली कटौती का मसला उठने लगा। पत्रकारों का कहना था कि बिजली आती नहीं ।बहुत परेशानी है। बिजली अधिकारी इस शिकायत को स्वीकार करने को तैयार नहीं है। बिजनौर मुख्यालय के वरिष्ठ पत्रकार होते थे नेपाल सिंह आर्य। आर्य जी अपना रुहेलखंड पत्रिका साप्ताहिक अखबार तो निकालते ही थे ,साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता थे। बिजनौर नगर पालिका के चेयरमैन भी रह चुके थे। उन्हें चलने में परेशानी होती थी तो सदा हाथ में छड़ रखते थे। बिजली विभाग की दलील उन्हें पसंद नहीं आई और उन्होंने गुस्से में कुर्सी से खड़े होकर अपनी छड़ बिजली इंजीनियर को दिखाई।   कहा सुधर जाओ नहीं तो अंदर कर दूंगा। उनका कहना था यह हंगामा मच गया। बिजली वालों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। पत्रकार भी अकड़ गए।प्रेस कॉन्फ्रेंस अब जंग कॉन्फ्रेंस में बदल को बदलने को तैयार थी।डीएम ने प्रेस कांफ्रेंस निरस्त करने की घोषणा की। समझा बुझा कर सबको हाल से बाहर भेजा।खैर सब पत्रकार बाहर आ गए।बिजली इंजीनियरों ने हड़ताल पर जाने की चेतावनी दे दी। कहा कि ये बर्दाश्त नहीं होगा ।पत्रकार आर्य जी के साथ थे ।बिजली को लेकर सबको नाराजगी तो थी। कई दिन जिंदाबाद- मुर्दाबाद हुई। बाद में डीएम ने बैठाकर मामला खत्म कराया ।

जब भी बिजली कटौती की बात आती है', नेपाल सिंह आर्य सदा याद आते हैं ।उनका गुस्से में अपनी छड़ी लहराना इतने साल बाद भी में  नही भूल पाया।

जब  में बिजनौर आया तों मेरा नेपाल सिंह आर्य से कोई परिचय नहीं था ।  वरिष्ठ पत्रकार राम कुमार वैद्य जी से मैने रिक्शा में जाते नेपाल सिंह आर्य के बारे में पूछा। उन्होंने अवगत कराया कि नेपाल सिंह आर्य सा आदमी  होना मुश्किल है।  पैर में तकलीफ होने के कारण वे रिक्शा  में चलते हैं ।वह आपको जानते हो या नही जानते हो। आपके कहने पर रिक्शा रोकेंगे आपकी बात सुनेंगे।

आप कहे डीएम काम नही कर रहा।वे आपको अपने साथ रिक्शा में बैठाएंगे और डीएम के पास ले जाएंगे।कहेंगे क्यों नही काम हो रहा।करो।


 बाद में आर्य जी से परिचय हुआ और वह बिजनौर में मेरे संरक्षक की तरह रहे।

आर्य जी बहुत मिलनसार थे।वे विधायक तो नही बने पर लखनऊ में विधायक से कम भी नही रहे।सचिवालय में बेधड़क आते- जाते थे।

वहाँ के सुरक्षा कर्मी भी कहते थे,एक ये विधायक है ,जो कभी चुनाव नही हारा। आर्य जी मुलायम सिंह जी के काफी नजदीक रहे।बहुत मिलनसार।आम आदमी के काम आने वाले।

अशोक मधुप

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