जिला जज कुलश्रेष्ठ से विवाद
पुरानी बात हो गई ।बिजनौर में अशोक कुमार डीएम ,निरंजन लाल एसपी और कुलश्रेष्ठ जिला जज होते थे ।इनकी तिगड़ी थी। तीनों साथ रहते । घूमते और मनोरंजन करते ।बिजनौर में नुमाइश में म्यूजिक कंपनी लगी थी ।यह तीनों रात में 12:00 के बाद वहां जाते।इन तीनों के लिए विशेष शो का आयोजन होता था ।विशेष शो की खबर अखबारों ने छाप दी। प्रदर्शनी की समाप्ति पर आयोजक नगर पालिका द्वारा कार्यक्रम में सहयोग करने वाले विभिन्न संगठनों ओर समाजसेवी को सम्मानित किया जाता था ।इसमें कुछ पत्रकारों को भी सम्मानित किया जाता रहा है। इस बार प्रदर्शनी के कार्यक्रम के समापन समारोह में पत्रकारों को सम्मानित किए जाने पर जिला जज कुलश्रेष्ठ साहब ने भाषण दिया। पत्रकारों से कहा कि वे अपनी खाल में रहें। उनके इस भाषण को सुन पत्रकारों ने सम्मान समारोह का बाय काट दिया । इस घटना को लेकर पत्रकारों में गुस्सा था।दो दिन बाद जिले भर के पत्रकारों का बिजनौर में प्रदर्शन हुआ।जज कुलश्रेष्ठ के विरुद्ध जमकर नारेबाजी हुई।
सारे पत्रकार जिला जज की टिप्पणी को लेकर नाराज थे, लेकिन प्रदर्शन की खबर सिर्फ अमर उजाला ने प्रकाशित की।अन्य किसी अखबार में नहीं प्रकाशित की।
खबर के छपने पर तो कुलश्रेष्ठ साहब कुछ नहीं कर पाए ।बस तिलमिला कर रह गए।
उन्होंने एक अन्य मामले को लेकर अमर उजाला को नोटिस भेज दिया।
प्रदर्शनी में एक न्यायिक अधिकारी की बेटी से हुई छेड़छाड़ के अमर उजाला में छपे समाचार के बारे में पूछा गया । कृपया बताएं कि किस न्यायिक अधिकारी की लड़की से छेड़छाड़ हुई।
दूसरे नंबर पर पूछा था कि समाचार कवर करने वाले पत्रकार का नाम बताएं।
नीचे दिया था हाई कोर्ट मुख्य न्यायाधीश संज्ञान में लाने के लिए जानना जरूरी है।
इसके बाद अमर उजाला के स्वामी आदरणीय अतुल महेश्वरी ने मुझे और बिजनौर के न्यायालय के समाचार देखने वाले साथी कुलदीप सिंह को मेरठ बुलाया।
उन्होंने न्यायपालिका की खबरों को लेकर बहुत सचेत किया।
उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया। बैंडिट क्वीन का मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन था। पीटीआई से खबर आई कि सर्वोच्च न्यायालय की बैंडिट क्वीन के केस को देखने वाली बेंच ने पिक्चर देखने की इच्छा जताई है। पीटीआई से आई खबर अखबारों ने छाप दी। सर्वोच्च न्यायालय की ओर से अखबारों को कोर्ट की मानहानि का नोटिस फिर भी आ गया।
उन्होंने बताया अखबार की ओर से न्यायालय में बिना शर्त माफीनामा दे दिया गया। इसके बाद भी शाम तक न्यायालय के बाहर खड़ा रखा
और ये चेतावनी देकर मामला खत्म किया कि आप लोग अपने दिमाग सही रखें।
उन्होंने कहा कि जिला जज से विवाद है ,तो उसकी शिकायत हाई कोर्ट को कराई जाए।वकीलों को साथ लिया जाए ।
दो चार ही दिन बीते थे कि उनका वकीलों से विवाद हो गया।
वकील उन्हें हटाने के लिए प्रयास करने लगे।हाईकोर्ट में शिकायत हुईं ।तब जाकर वह हटे।
नोटिस का अमर उजाला की ओर से जवाब दिया गया।
कि लड़की की स्मिता और सम्मान का सवाल है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश है कि पीड़ित लड़की और उसके परिवार की पहचान न बताई जाए।इसलिए हम लडकी का नाम और पहचान आपको बताने के लिए बात ही नहीं है।
हमने बताया कि घटना वाली रात में छेड़छाड़ के मामले में एक युवक गिरफ्तार हुआ है।केस का नम्बर भी हमने दे दिया।
समाचार कवर करने वाले पत्रकार का नाम जानने ले सवाल कहा गया कि
सर्वोच्च न्यायालय और प्रेस काउंसिल के निर्णय अनुसार समाचार सूत्र का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं है।
इसके नीचे लिख दिया गया यदि माननीय उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायधीश ने जानना चाहा तूने बता दिया जाएगा।
नोटिस के जवाब की प्रति हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश को भी भेज दी गई।दरअसल कुलश्रेष्ठ साहब हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश का नाम लेकर हमें धमकाकर कर पीड़ित न्यायिक अधिकारी की लड़की का नाम हमसे लिखित में जानना चाहते थे।हम बता देते तब वह घेरते।नही बताया तो वह चुप हो गए।
उनके तबादले के बाद यह प्रकरण खत्म हो गया।
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