रामेश्वर राणा
रामेश्वर राणा
जन्म तिथि पांच
जनवरी 1955
निधन सात अप्रेल
1989
रामेश्वर राणा जैसा पत्रकार मैने जीवन में नही देखा।वह सामने वाले को इस तरह प्रभावित करते कि उससे अपना मन चाहा काम करा लेते।
उनका जन्म पांच
जनवरी 1955 को रेहड़ में हुआ।वे बताते थे कि उनकी मां रेहड स्टेट के किसी राजकुमार की
पत्नी की सहेली थी।राजकुमारी शादी होकर
रेह़ड़ आई तो
उन राणाजी की मां भी उनक साथ आई।वह यहीं
रहकर पढ़े। कितना पढ़े ये पता नही
चलता,किंतु उनका लेख बहुत अच्छा था।भाषा
पर नियंत्रण था। युवावस्था में उनके संबध रेहड़ के राजमहल की किसी युवती से हो गए।
राजा साहब को पता चला। उन्होंने राणा को बुरी तरह पीटा। मरा समझकर जंगल में फिंकवा दिया।
वह बच गए। दया करके किसी ने इलाज कराया। पत्रकार कैसे बने ,ये पता नही किंतु साप्ताहिक निकलते। सारा खर्च इसी से चलता।जनपद के कई प्रमुख व्यक्तियों से उनके संबध थे। वे बिजनौर टाइम्स , राष्ट्रवेदना और उत्तर भारत टाइम्स में भी रहे और प्रचार तथा विज्ञापन का कार्य किया।
अखबार में थे। सो अधिकारियों से उनके संपर्क थे। इन्ही संबधों की बदौलत अपनी पत्नी को इन्होंने विकास विभाग में नौकरी दिलाई। अपने परिवार के लिए सरकारी क्वार्टर भी अलाट करा लिया।मैं उत्तर भारत टाइम्स में काम करता था। संपादन की सारी जिम्मेदारी मेरी थी।किंतु संपादक राजेंद्र पाल सिंह कश्यप ने कभी अखबार में मेरा नाम नही छापा।राणा जी कश्यप साहब के पास आने लगे। उन्हें प्रभावित किया साथ ही काम करने के पहले दिन से अखबार में प्रसार प्रबंधक में उनका नाम छपने लगा। रामेश्वर राणा जी के दो सुपुत्री हैं। उनका निधन सात अप्रेल 1989 का हुआ।
रामेश्वर राणा ने पहला साप्ताहिक कंटकपथ चलाया ।बाद में ये दिलावर सिंह चौहान को दे
दिया।दूसरा साप्ताहिक बहादुर सिपाही 1889
में शुरू किया।तीसरा साप्ताहिक आजाद सितारा था। ये खेडी भोजपुर से निकलता
था।
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