जब डीएम के अर्दली को ज्ञापन दिया
जब डीएम के अर्दली को
ज्ञापन दिया
श्रमजीवी पत्रकार यूनियन
की बिजनौर इकाई ने पत्रकारों के किसी
मामले को लेकर अगले दिन प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।कारण
क्या था, अब ये याद नहीं।शायद उस समय
श्याम सुंदर डीएम थे। पत्रकार राजेंद्र पाल सिंह कश्यप यूनियन के
प्रदेशीय उपाधयक्ष होते थे। मैंने उन्हें
अवगत कराया भी कि कल रविवार है। उन्होंने कहा
− होने दो । महत्वपूर्ण मामला है।प्रदर्शन
कल ही होना है। तै हो
गया। अखबारों में सूचना छाप दी
गई कि जनपद के पत्रकार 12 बजे टाउनहाल में
एकत्र हाकर प्रदर्शन करते कलेक्ट्रेट जाएंगे और डीएम का एक ज्ञापन देंगे।
जनपद के पत्रकार आ
गए।टाउन हाल में काफी देर भाषण हुए।निर्धारित समय पर प्रदर्शन शुरू हो गया। पत्रकारों के प्रदर्शन मौन होते हैं, तो यह प्रदर्शन भी मौन ही था। प्रदर्शन कलेकट्रेट पंहुचा। अवकश के कारण कलेकट्रेट बंद था। नियमानुसार अवकाश में भी एक मजिस्ट्रेट डयूटी
पर रहता है। वह भी नही था। सब को गुस्सा बहुत आया। तै हुआ कि डीएम के निवास चला जाए।कलेक्ट्रेट
के सामने डीएम निवास था। प्रदर्शन करते
पत्रकार डीएम निवास पहुंच गए।पता चला कि
डीएम भी बाहर गए हैं।पत्रकारों का ज्ञापन लेने
के लिए कोई अधिकारी नही है।इस पर सभी को बहुत गुस्सा आया। अधिकतर की राय बनी कि
जिलाधिकारी निवास की दीवार पर ज्ञापन चिपका
दिया जाए।
हमारे पास डीएम का अर्दली रामचंद्रर खड़ा सब देख रहा था।
कश्यप साहब ने उसे देखकर कहा कि अरे आज की बिजनौर का डीएम तो ये हमारे पास है। आज
से रामचंद्रर बिजनौर का डीएम है।इसे ही ज्ञापन
दिया जाए। सबको
उनकी बात अच्छी लगी ।राम चंदर को ज्ञापन देकर पत्रकर लौट आए।खबरों में छपा
कि पत्रकारों का ज्ञापन
लेने के लिए बिजनौर मुख्यालय पर कोई अधिकारी नही था, मजबूरी में डीएम की कोठी पर
मौजूद डीएम के अर्दली रामचंदर को ज्ञपन सौपा गया।खबर छपने पर डीएम को बडी बेइज्जती महसूस हुई। कई दिन तक वह पत्रकारों को फान कर अपनी गलती स्वीकार
करते रहे। माफी मांगते रहे।
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