उमेश डोभाल
मेरे विश्व मानव सहारनपुर
में छपे एक लेख को लेकर उत्तरांचल वासी बहुत नाराज थे। मेरे विरूद्ध देहरादून में मुकदमें दर्ज थे। ऐसे में मैं एक बार
किसी काम से मेरठ अमर उजाला गया हुआ था। प्रेस के बाहर एक ढ़ाबे पर उत्तरांचल के
तेज तर्रार पत्रकार उमेश डोभाल से परिचय हुआ। बातचीत होने लगी।दोनों ने साथा− साथ
खाना खाया। मैंने उन्हें बिजनौर और उन्होंने मुझे पौड़ी आने का निमंत्रण दिया। मैंन हंस कहा− मित्र उत्तरांचलवासी
तो मेरी जानके प्यासे है।उन्होंने एक मोटी सी गाली दी और कहा – आओ पूरा उत्तरांचल घूमाऊंगा। देखता हूं आपको कौन क्या कहेगा। आपके भाई के होते किसी
में विरोध करने का बूता नहीं।
बात आई –गई हो गई। न उनका बिजनौर आना हुआ, न मेरा उनके पास जाना।उत्तरांचल में बिक रही शराब
के विरूद्ध लगातार उनकी खबर छपतीं रहीं। 25 मार्च 1988 को उनके गायब होने की सूचना
मिली। गायब होने के दिन वह पौड़ी में थे।अमर उजाला ने उनका पता लगाने की मांग
उठानी शुरू की। चर्चा चलने लगी कि पौड़ी के शराब माफिया मनमोहन सिंह नेगी ने उनकी हत्या करा दी। अमर उजाला के स्वामी अतुल
माहेश्वरी जी ने उनकी गुमशुदगी की सीबीआर्इ से जांच कराने की मांग उठाने का निर्णय
लिया। उनके लिए पौड़ी में प्रदर्शन करना तै हुआ।
निर्धारित दिन मेरठ से अतुल
जी की कार में अमर उजाला मेरठ के क्राइम रिपोर्टर राजेंद्र त्रिपाठी और संपादक
राधेश्याम शुक्ला जी बिजनौर आ गए। बिजनौर से उनके साथ हमारे साथी कुलदीप सिंह प्रदर्शन में भाग लेने पौड़ी गए। अतुल
जी के चालक ईश्वरी कार चला रहे थे। प्रदर्शन में कुमायूं तक के पत्रकार शामिल हुए।
प्रदर्शन के बाद ईश्वरी जब
वापस चले तो उन्हें लगा कि उमेश डोभाल का हत्यारा मनमोहन नेगी अलग कार से कुछ
लोगों के साथ इनका पीछा कर रहा है। अनजान जगह,अनजान पहाड़ी रास्ता सबकी सांस फूलने लगी।ईश्वरी कार दौड़ाने लगा। पहाड़ी रास्ते पर
ईश्वर को गाड़ी चलाने का ज्यादा अभ़्यास नहीं था। पर जान सबको प्यारी होती है, सो हरचंद गाड़ी दौड़ाने का प्रयास कर रहा था। जरा
सी चूक में एक और गाड़ी के खाई में गिरने का डर था तो दूसरी और कार के
पहाड़ी से टकराने का भय। उस समय मोबाइल फोन होते नहीं थे कि पुलिस किसी अन्य को
बताया जा सके।
सबको मौत दिखाई दे रही थी। ऐसे में ईश्वरी ने कहा – गाड़ी भगाने में दुर्घटना होने का ज्यादा खतरा है, ऐसे में आराम से चलते हैं। आने वालों को आने दो ।
तैयार रहना। भिड़ जाएंगे। एक ही तो गाड़ी है। उसमें चार पांच ही होंगे। देखा जाएगा।ईश्वरी की बात सबकी
समझ में आ गई। कुछ देर बाद पीछे आ रही कार दिखाई देनी बंद हो गई। फिर ये आराम से आए। ईशवरी , कुलदीप सिंह एवं राजेंद्र त्रिपाठी जी आज भी घटना के याद आने पर
सिहर जातें हैं।
अमर
उजाला और उत्तरांचल के पत्रकारों के दबाव पर उमेश डोभाल के गायब होने की सीबीआई
जांच हुई। इसमें मनमोहन सिंह नेगी समेत 13 के विरूद्ध कोर्ट में चार्जशीट दाखिल
हुई। सबूत के अभाव में केस छूट गया।
उमेश डोभाल आज हमारे बीच
नहीं हैं। उनकी स्मृति में प्रतिवर्ष पौड़ी में एक कार्यक्रम होता है। इसमें उत्तरांचल के एक पत्रकार को सम्मानित किया जाता है।
उमेश
डोभाल को अपनी मौत का काफी पहले अंदेशा हो गया था।श्रद्धांजलि स्वरूप उनकी
कविता मैं मार दिया जाउंगा, नीचे दी जा रही है−
अब मैं मार दिया जाऊंगा
– उमेश डोभाल
मैंने
जीने के लिए हाथ उठाया
और वह झटक दिया गया
मैंने स्वप्न देखे
और चटाई की तरह अपनों के
बीच बिछा
उठा कर फेंक दिया गया
अंधेरी
भयावह सुरंग में …
रोशनी
मैंने वहां भी रोशनी तलाश
की
अब मैं मार दिया जाऊंगा
उन्हीं के नाम पर
जिनके लिए संसार देखा है
मैंने
अब मैं
मार दिया जाऊंगा
– उमेश डोभाल
मैं
जीने के लिए हाथ उठाया
और वह झटक दिया गया
मैंने स्वप्न देखे
और चटाई की तरह अपनों के
बीच
बिछा उठा कर फेंक दिया गया
अंधेरी
भयावह सुरंग में
…रोशनी
मैंने
वहां भी रोशनी
तलाश की
अब मैं मार दिया जाऊंगा
उन्हीं के नाम पर
जिनके लिए संसार देखा है
मैंने
उमेश डोभाल
− अशोक मधुप
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