मेरा सरकारी जन्मदिन

 सरकारी जन्म दिन


सकूल के प्रमाण पत्र के हिसाब से आज मेरा जन्म दिन है। एक तरह से इसे सरकारी जन्मदिन भी कहा जा सकता है। सरकारी रिकार्ड में  होने के कारण सरकारी जन्म दिन ही होगा।  गुरूजन,मित्रों और शुभचिंतकों द्वारा बधाई  देने का सिलसिला जारी है । बच्चे मेरा जन्म दिन दो बार मनाते  हैं। आज के दिन और  मीठी ईद के दिन।

हम तो उस पीढ़ी की पैदायश हैं। जब जन्म दिन न मनाया जाता था। न किसी को याद होता है। रोजमर्रा की कशमकश से जूझते कब जन्म दिन  निकल जाता, पता ही नहीं चलता था। स्कूल सर्टिफिकेट  में होने के कारण जन्म दिन १७ जुलाई हो गया ।  वैसे क्या है किसी को  पता नहींं? मां-पिता बुजुर्ग बताते थे कि मंै   मीठी ईद के दिन पैदा हुआ था।

हमारे समय में बुजुर्ग ज्यादा पढ़े लिखे तो होते नहीं थे। छह सात साल की उम्र होने पर  बच्चे को पकड़कर स्कूल ले जाते। हेडमास्टर के बताने पर कह देते उम्र छह साल है। हेडमास्टर अपने हिसाब से जन्म तिथि लिख लेते। मेरा पहली में प्रवेश किस परिवार जन ने स्कूल जाकर कराया पता नहीं।  सर्टिफिकेट में उम्र  १७ जुलाई १९५० दर्ज हो गई। 

बुजुर्ग भले ही कम पढ़े होते पर वे ज्ञानी बहुत होते थे।  इस बात का ध्यान रखते किलड़के की उम्र कम लिखवाई जाए। ताकि यदि  वह पढ़ाई के दौरान एक दो साल फेल हो जाए तो ओवर एज  न हो जाए। लड़की के बारे में ऐसा नहीं होता था। लड़की ज्यादा पढ़ती नहीं थी। नौकरी करने की सोचना ही अतिश्योक्ति थी। सो उनकी जन्म तिथि कम लिखाने की सोची भी नहीं जाता थी। कई  बार आयु से ज्यादा उम्र लिखा दी जाती। 

हमारे समय में कांवेट स्कूल नहीं होते थे। चुंगी स्कूल होते थे।  इन्हें सरकारी स्कूल कहा जाता था। शहरों की शिक्षा नगर पालिका के  अधीन होती  तो गांव की शिक्षा जिला परिषद के अधीन । कक्षा एक से पांच के स्कूल प्राइमरी और छह से आठ के जूनियर कहलाते थे। कक्षा एक में प्रवेश के समय उम्र छह साल होनी जरूरी मानी जाती थी।

एक मजेदार बात कई  बार बच्चा ज्यादा तंदुरूस्त होता । परिवार जनों को आयु भी कई बार याद नहीं होती थी। तो शिक्षक  आयु का  पता लगाने के लिए बच्चे के  हाथ को  सिर से उतारकर दूसरी ओर का कान पकडऩे को कहते। जो  बच्चा पांच साल या ज्यादा का होता, वह सिर से हाथ ले जाकर दूसरी साइड का कान पकड़ लेता। जो कम का होता वह नही पकड़  पाता ।   

आज भी सरकारी स्कूल में पुराने शिक्षक कई  बार आयु  का निर्धारण न होने पर यही फार्मूला प्रयोग करतें हैं ।

बाद में मैने नेट पर खोज की तो पाया कि 1950 में मीटी ईद 17 जुलाई की ही थी।











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