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Showing posts from June, 2026

जुगाड कैलास यात्रा

  एक जुगाड़ 2012 में हम कैलाश यात्रा कर गए। दो सीनियर सिटीजन के लिए ट्रैवल एजेंट एक शेरपा की व्यवस्था करता है ताकि वह उनकी देखरेख करें। हमारे साथ भी एक शेरपा यात्रा में था। कैलाश यात्रा में सबसे कठिन है , कैलाश की परिक्रमा करना । लगभग 45 किलोमीटर की   परिक्रमा तीन चरणों में तीन दिन में पूरी होती है। दूसरा और तीसरा चरण बहुत कष्ट होता है। दूसरे चरण में आठ 10 किलोमीटर के ट्रैक पर बर्फ ही बर्फ होता है। एक स्थान पर मेरी पत्नी को समस्या हुई। हमारे साथ चल रहे शेरपा ने अपनी कमर में बंधे   हवा भरने वाले तकिए में लगा पाइप मेरी पत्नी की नाक में लगा दिया।   । मेरे पूछने पर उसने बतलाया कि तकिए में वह जरूरत के लिए ऑक्सीजन लेकर चलते है। सिलेंडर लेकर चलना बहुत कठिन होता है। हम तकिए में ऑक्सीजन भर लेते हैं। ताकि यात्रा में श्रद्धालुओं को परेशानी होने पर इसका उपयोग करते हैं। एक सिलेंडर में कई सौ तकिए ऑक्सीजन से भरे जा सकते हैं।

नहटौर के पत्रकार असलम का संस्मरण

  दो दशक तक मुझे अमर उजाला नहटौर में संवाददाता के रूप में काम करने का मौका मिला।इसका सारा श्रेय अशोक मधुप जी   जिला प्रभारी को जाता है। उनके सानिध्य औ र छत्रछाया में रहकर पत्रकारिता के गुर सीखे औ र खबरों की दुनिया के कटु अनुभव को आत्मसात किया। खबरों के   संकलन औ र   लेखन में उनकी नसीहत सदैव मार्गदर्शक बनीं। परन्तु पत्रकार साथियों के साथ समय− समय पर   होने वाली शत्रुवत   हिंसक घटनांए सबको विचलित कर डालतीं। उक्त घटना ओ ं को ज्यादा दिनों तक महत्ता देना हमारे अखबार का ट्रेड भी नहीं था। इन विषम परिस्थितियों में मधुप   जी अपने आला अफसर से अपने   पसर्नल संबंध, सूझबूझ औ र अथक प्रयास से    कोई न कोई रास्ता   निकाल ही लेते।   इससे पत्रकार साथी का   मान सम्मान बच जाता। जिले के अफसर में मधुप जी का बेहद सम्मान औ र रूतबा था। अधिकारी उनके मुंह से निकले शब्दों का पूरा करने में गर्व महसूस करते थे। ऐ से अनेक मसलों का   लेखक स्वयं साक्षी रहा है। ऐ सा ही एक वाक्या अचानक मुझे   याद आ गया। बोर्ड परीक्षा ओ ं में नकल की खबर उस ज...

झालू में माकपा का धरना

झालू में माकपा का धरना मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का जब मैं सदस्य था। तो हमारी पार्टी के एक पदाधिकारी के चाचा जी का हल्दौर के थानाध्यक्ष बरन सिंह सिद्धू से किसी बात पर झगड़ा हो गया। बताया  गया के महानुभाव नशे में थाने चले गए थे । इसपर  सिद्धू साहब ने उन्हें डॉट दिया। बात पार्टी के  बड़े नेताके चाचा जी के अपमान की थी। सो पुलिस ज्यादती को लेकर पार्टी की ओर से झालू में  बरन सिंह सिद्धू को हटाने के लिए छतरी वाले कुएं के आगे  धरना शुरू कर दिया गया। बरनसिंह सिद्धू  की क्षेत्र और विभाग में बहुत अच्छी छवि थी। अपराधों  पर नियंत्रण लगाने के लिए वह विख्यात थे। उन्होंने कई एनकाउंटर में किए थे। उनके  समर्थन में झालू के क्रेशर मालिक करण सिंह राणा औ र  उनके साथी हमारे सामने  धरने पर बैठ गए। आमने −सामने धरना चला। मेरे चाचा राजेंद्र शर्मा मुझे बहुत प्यार करते थे वह मेरे कम्युनिस्ट पार्टी के जाने से नाराज थे। इसका कारण झालू के चेयरमैन कामरेड जफर  थे। ये मुझे बहुत बाद में पता चला कि  मेरे चाचा जी किसी कार्य से जफर के पास गए थे। जफर ने  ठीक...