झालू में माकपा का धरना
झालू में माकपा का धरना
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का जब मैं सदस्य था। तो हमारी पार्टी के एक पदाधिकारी के चाचा जी का हल्दौर के थानाध्यक्ष बरन सिंह सिद्धू से किसी बात पर झगड़ा हो गया। बताया गया के महानुभाव नशे में थाने चले गए थे । इसपर सिद्धू साहब ने उन्हें डॉट दिया। बात पार्टी के बड़े नेताके चाचा जी के अपमान की थी। सो पुलिस ज्यादती को लेकर पार्टी की ओर से झालू में बरन सिंह सिद्धू को हटाने के लिए छतरी वाले कुएं के आगे धरना शुरू कर दिया गया। बरनसिंह सिद्धू की क्षेत्र और विभाग में बहुत अच्छी छवि थी। अपराधों पर नियंत्रण लगाने के लिए वह विख्यात थे। उन्होंने कई एनकाउंटर में किए थे।
उनके समर्थन में झालू के क्रेशर मालिक करण सिंह राणा और उनके साथी हमारे सामने धरने पर बैठ गए। आमने −सामने धरना चला।
मेरे चाचा राजेंद्र शर्मा मुझे बहुत प्यार करते थे वह मेरे कम्युनिस्ट पार्टी के जाने से नाराज थे। इसका कारण झालू के चेयरमैन कामरेड जफर थे। ये मुझे बहुत बाद में पता चला कि
मेरे चाचा जी किसी कार्य से जफर के पास गए थे। जफर ने ठीक होते भी काम करने से मना कर दिया था। उन्होंने मुझे कभी नहीं बताया ,लेकिन वह चाहते थे कि में इन लोगों से दूर रहूं। लेकिन में इनके साथ लगातार घूम रहा था। एक दिन मेरा नंबर आया और मैं धरने पर बैठ गया। चाचा जी मुझसे बहुत नाराज हुये। कहां अब ये घर में नहीं आएगा।घर का रास्ता आने जाने का एक ही था। मैंने उनका सम्मान रखने के लिए घर के द्वार से न जाने का निर्णय लिया ।हमारे हिस्से में आगे बैठक थी और पिछली साइड में वरांडा और कमरा।
बैठक में तीन अल्मारियां बनी हुई थी ।बरामदे से लगी अलमारी की दीवार निकाल कर मैने उसके घर में आना-जाना शुरु कर दिया।
ये बाद में भी काफी समय तक चलता रहा। इसी दौरान मेरा संघ की शाखा में भी आना-जाना शुरू हो गया। संघ वालों यह पता नहीं था कि मैं कम्युनिस्ट पार्टी का सदस्य हूं।
मेरे भूख हड़ताल पर बैठने के बाद संघ वालों को पता लग गया। उन्होंने मुझसे दूरी बनानी शुरू कर दी। बरन सिंह सिद्धू का तबादला नहीं हुआ। अपने −सामने आंदोलन शुरू होने पर हमें हमें अनशन खत्म करना पड़ा। बरन सिंह को हटवाने के लिए जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन हुआ। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को सच्चाई पता लग गई थी। उन्होंने बरन सिंह सिद्धू को हटाने से मना कर दिया। बरन सिंह सिद्धू तभी हटे जब एसपी का बिजनौर से तबादला हो गया।
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